Sunday, August 7

दीपिका पादुकाेण

Film Review | Padmavat | फ़िल्म रिव्यू | पद्मावत
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Film Review | Padmavat | फ़िल्म रिव्यू | पद्मावत

दीप जगदीप सिंह | रेटिंग 2/5संजय लीला भंसाली की पद्मावत इतिहास नहीं, बल्कि मलिक मोहम्मद जयसी की काव्य कल्पना का दृश्यात्मक वर्णन है। भंसाली के चिरपरिचित अंदाज़ में यह ज़रूरत से ज़्याद खिंचा हुआ और विहंगम बनाने की कोशिश में अत्यधिक डार्क हो गया है।   कहानी बिल्कुल सीधी है, सिंघल की राजकुमारी पद्मावति बला सी खूबसूरत है, जिस पर चितौड़ का रावल रत्न सिंह मोहित होकर उसे ब्याह ले जाता है। उधर दुनिया जीतने की लालसा में अपनो का ही खून बहा कर अलाउदीन खिलजी हिंदुस्तान के तख़्त पर काबिज़ हो जाता है। एक तरफ़ रावल रत्न सिंह पद्मावति के साथ अपनी ज़िंदगी का आनंद ले रहा है तो दूसरी तरफ़ खिलजी पूरी धरती पर अपनी हकूमत चलाने का ख़ाब पूरा करने में जुटा है, तभी एक ऐसी साजिश होती है, जो खिलजी को कहने के लिए मजबूर कर देती है, सरहदें बोहत फैला दी, अब बाहें फैलाएंगेलेकिन यह बाहें वह अमन के लिए नहीं अपनी हवस के लि...