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Film Review | Hindi Medium | हिंदी मीडियम
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Film Review | Hindi Medium | हिंदी मीडियम

अमीर और गरीब के बीच झूलते मध्यवर्ग का द्वंददीप जगदीप सिंहकथा-पटकथा - साकेत चौधरी और ज़ीनत लखानी संवाद - अमितोश नागपालहिंदी मीडियम उस शुद्ध मध्यमवर्ग की फ़िल्म है जिसे गरीब से एलर्जी हो जाती है और अमीरों की नकल ना करे तो जुलाब लग जाते हैं, फिर अमीर दिखते-दिखते चाहे वह सड़क पर ही क्यों ना   आ जाए। लेकिन यह सिर्फ़ आर्थिक आधार पर वर्ग विभाजन की ही फ़िल्म नहीं है, यह भाषा और शैक्षिण ढांचे के विभाजन की भी फ़िल्म है जो आर्थिक वर्ग विभाजन की रेखा को ना सिर्फ़ और गहरा करता है, बल्कि बनाए रखने पर पूरी तरह से अमादा है। हिंदी मीडियम दोहरी मध्यवर्गीय मानसिकता पर चुटीला व्यंग्य तो करती है लेकिन ख़ुद ही अतिरेकता, रूढ़ीवाद और विरोधाभासों का शिकार भी हो जाती है। बावजूद इसके यह एक अर्थपूर्ण मनोरंजक फ़िल्म है।राज बतरा (इरफ़ान ख़ान) दिल वालों की दिल्ली के दिल चांदनी चौक में कपड़ों का आलीशान शोरूम चलाता है ज...