Friday, August 12

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Film Review | दंगल धाकड़ है!

दीप जगदीप सिंहरेटिंग 4/5हिंदी सिनेमा के जंगल में बड़े-बड़े सूपर स्टार पहलवान आते हैं अखाड़े में दांव लगाते हैं कुछ कई सौ करोड़ की ट्राफी जीत कर भी चारो खाने चित्त हो जाते हैं और कई बाॅक्स आॅफिस के खोपचे में सांस लेने से पहले ही दम तोड़ देते लेकिन उनका दांव ऐसा होता जो दर्शकों के दिल पर धोबी पछाड़ दे देता है।   उनमें से कुछ एक पहलवान बस अपनी पीठ थपथपाते रहते हैं, लेकिन जो दर्शकों का दिल जीतता है वो असली पहलवान कहानी  होती है। दंगल में भी जो असली पहलवान है, वह कहानी है, इसी लिए दंगल धाकड़ है और बाॅक्स आॅफिस पर दंगल का मंगल लंबा चलेगा।यूं तो दंगल की कहानी प्रिडिक्टेबल है और उसी तैय पटड़ी पर दौड़ती है जिसके अंत में नायक हर मुश्किल को पार करते हुए जीत जाता है। दंगल को देखते हुए यह भ्रम पैदा हो सकता है कि असल में नायक कौन है। अपना सपना पूरा करने के लिए समाज की हर परंपरा तोड़ने और दुनिया भर से द...