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भगत सिंह से आख़री मुलाकात…
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भगत सिंह से आख़री मुलाकात…

रात के दो बजे मैं आँखें मूंदे सोच रहा था, भगत सिंह का दिन आ रहा है। विचार की चिड़िया ने अभी पंख खोले ही थी कि मैंने विचारों की दुनिया के अंदर धुएँ के बादलों में से एक परछाई को निकलते देखा। इस आत्मा के माथे पर चिंता की लकीरें साफ झलक रही थीं। इससे पहले कि मैं कुछ पूछ पाता, उसने मुझे कुछ लिखने के लिए इशारा किया और मेरी कलम कागज़ पर जम गई, उसने लिखवाया- चित्रांकन: गुरप्रीत सिंह, आर्टिटिस्ट, बठिंडा सबसे पहले मैं अपने देश के नेताओं, राजनीतिक दलों, संगठनों और गणमान्य व्यक्तियों से अनुरोध करना चाहूंगा कि इस बार चौक में मेरी और मेरे साथियों की मूर्तियों के गले में मालाओं के ढेर न पहनाएं जाएं, क्योंकि आज-कल देश की फिज़ा में ही बहुत घुटन महसूस कर रहा हूं। फूल-मालाओं का पहाड़ खड़ा करके आप हमारे लिए सांस लेना भी मुश्किल कर देते हैं। वैसे भी आप 23 मार्च या 28 सितंबर को फिर से आकर ही दोबारा हमा...