Thursday, August 11

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सफ़ैद चीनी है धीमा ज़हर

आधुनिक आहार का सबसे ख़तरनाक तत्व बन गई है रिफाईंड चीनीप्राचीन भारत हमेशा से चीनी और मीठे को आहार का मूलभूत हिस्सा मानता रहा है। भारतीय चीनी व्यपार के 2013 के आंकड़ों के मुताबिक दुनिया में ब्राज़ील के बाद चीनी का दूसरे नम्बर का उत्पादक और चीनी का सबसे बड़ा उपभोक्ता भारत है। सक्रोज़ और हाई फ्रुकटोज़ काॅर्न सिरप जैसी रिफाईंड चीनी में कैलरीज़ की भारी मात्रा होती है और पोषक तत्व बिल्कुल नहीं होते। निधार्रित से 10 से 20 प्रतिशत ज़्यादा चीनी का सेवन करने पर सेहत पर इसके काफ़ी दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। इसका पाचन तंत्र पर काफी बुरा असर पड़ सकता है और जीवनशैली की अनेक बीमारियों का कारण बन सकती है।आईएमए के नैशनल प्रेसीडेंट एंव एचसीएफआई के प्रेसीडेंट पद्मश्री डॉ केके अग्रवाल और आईएमए के जनरल सेक्रेटरी डाॅ आरएन टंडन ने बताया कि चीनी में सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह रक्त वाली धमनियों की दीवारों में गंभीर सूजन लात...
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रमज़ान में कुछ लोगों की सेहत पर भारी पड़ सकते है रोज़े

रमज़ान का महीना अध्यात्मिक चिंतन, सुधार और मुस्लिम धर्म के प्रति और अधिक श्रद्धा प्रकट करने का महीना है। इस पूरे महीने के दौरान इस्लाम के सिद्धांतों पर मन लगाना और सूर्य उदय से लेकर सूर्यास्त तक उपवास करना होता है। सुर्य निकलने से पहले के आहार को सुहूर और सूर्यास्त के बाद के आहार को इफ्तार कहा जाता है। कुरान के मुताबिक रोज़े के ज़रिए दुनियावीं ची़जों से मन को दूर कर अपनी रूह को शुद्ध करने के लिए हानिकारक अशुद्धियों से मुक्त होना है। इस बारे में जानकारी देते हुए हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट और आईएमए के आनरेरी सेक्रेटरी डॉ केके अग्रवाल ने बताया कि महीने भर के लिए उपवास करना हमारे शारीरिक प्रणाली के शुद्धिकरण और तन व मन को संतुलित करने के लिए एक अच्छा तरीका है। लेकिन डायब्टीज़ जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों की सेहत के लिए भूखा रहना ख़तरनाक हो सकता है। यह बात डायब्टीज़ पीड़ितों के मन स...
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डायब्टीज़ बन रहा है दिल के रोगों का सबसे बड़ा कारण

पिछले 15 सालों से लगातार 100 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है डायब्टीज़डायब्टीज़ वालों को दिल के दौरे का दुगना ख़तराइंटरनैशनल डायब्टीज़ फैडरेशन के मुताबिक, भारत 65.1 मिलीयन डायब्टीज़ के मरीज़ों का घर है और यह आंकड़ा अगले दो दशकों में 100 मिलीयन तक पहुंचने वाला है। जीवनशैली और आबादी में बदलाव, जैनेटिक कारण, अनुचित आहार और आलसी जीवनशैली आदि इस के प्रमुख कारण हैं। वैसे तो डायब्टीज़ के लक्ष्ण प्रत्यक्ष नहीं होते और इसका पता नहीं चलता लेकिन हमारी सेहत और शरीर पर पड़ने वाले इसके प्रभाव को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। डायब्टीज़, दिल के रोगों और स्ट्रोक जैसी बीमारियों का सीधा खतरा है। यहां तक कि तीन में से दो डायब्टीज़ पीड़ि‍त इन दोनों से किसी रोग से ही मरते हैं। फिर भी देश में 50 प्रतिशत डायब्टीज़ के मामलों की जांच ही नहीं होती और इनका इलाज बहुत देर से हो पाता है। इस बार 'बीट डायब्टीज़' की थीम ...
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लंबी बीमारियों में मददगार साबित हो सकता है योग

योग से हाईपरटैंशन, डायब्टीज़ और दिल से जुड़ी समस्याओं में लाभ मिल सकता हैपिछले साल दिसंबर में युनाईटेड नेशनस की जनरल एसेंबली ने 21 जून को अंतराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। योग 5000 साल पुराना शारीरिक, मानसिक और अध्यात्मिक अभ्यास है जिसका मकसद मन, मस्तिष्क और आत्मा को रूपांतरित करना है। पिछले कुछ दशकों में, योग को पूरी दुनिया के लोगों ने तंदुरुस्ती और स्वास्थय की पवित्र पद्धति के रूप में अपनाया है। अपने स्थापित स्वास्थ्य लाभों की वजह से, एलोपैथिक दवाओं के साथ ही अब डाॅक्टर बहुत बढ़-चढ़ कर मनोदैहिक और शरीर को कमज़ोर करने वाली पुरानी बीमारियों से जूझ रहे मरीज़ों को योग करने की सलाह देने लगे हैं। मेडिटेशन यानि ध्यान से तनाव कम हाेता जिससे हाई ब्लड प्रैशर से आाराम मिलता हैयोग उन बीमारियों से निपटने में काफी कारगर है, जिनमें मानसिक और सामाजिक कारण जैसे कि तनाव...