Friday, August 12

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कम नींद से हो सकता है दिल को ख़तरा

नींद की कमी हो सकती है गंभीर दिल के रोगों का कारण83 प्रतिशत दिल के रोगियों को होता है स्लीप एपनिया। स्लीप एपनिया नींद का एक विकार है जिसमें सांस में रूकावट आने से नींद टूट जाती है। इससे पीड़ित गंभीर व्यक्ति एक घंटे में पांच से तीस बार सांस रूक सकती है। पांच में से एक व्यस्क मध्यम स्लीप एपनिया से पीड़ित होते हैं, यह महिलाओं की तुलना में पुरूषों को ज़्यादा प्रभावित करता है। सबसे आम समस्या आॅबस्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया है, जिसमें छाती के ऊपरी हिस्से और गर्दन पर वज़न पड़ने से सांस में रूकावट पैदा हो जाती है और नींद खुल जाती है।इस बारे में जानकारी देते हुए आईएमए के नैशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट एंव एचसीएफआई के प्रेसीडेंट डॉ केके अग्रवाल ने बताया कि समय के साथ नींद पूरी ना होने की वजह से दिल के रोगों की समस्या का खतरा बढ़ सकता है। थोड़े समय के लिए नींद की कमी से हाई कोलेस्ट्रोल, हाई ट्रिग्लिसेराईड्स और ह...
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रक्तदान करने से सेहत को होते हैं यह 5 फायदे

14 जून को रक्तदान दिवस मनाया जाता है; नियमित रूप से रक्तदान करते रहने और इसके स्वास्थय को होने वाले फायदों के बारे में जागरूक होना ज़रूरी है। रक्तदान से किसी का जीवन तो बचाया जा ही सकता है, रक्तदान करने वाली की सेहत को भी इसके कई फायदे होते हैं। रक्तदान करने से कैंसर और हैमोक्रोमैटोसिस का खतरा कम होता है, लीवर और पैनक्रिआस के डैमेज होने का खतरा, मोटापा कम होने के साथ ही दिल की सेहत अच्छी रहती है। रक्तदान के पांच प्रमुख फायदे विस्तार से जानने से पहले आईए जान लेते हैं रक्तदान की ज़रूरत क्यों पड़ती है   डब्लयूएचओ की 2012 की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल केवल नौ मिलीयन यूनिट रक्त एकत्र किया जाता है जबकि आवश्यकता 12 मिलीयन यूनिट की पड़ती है। दिल्ली एनसीआर में 1 लाख यूनिट की कमी हर साल पाई जाती है। आंकड़ों के मुताबिक भारत में 234 मिलीयन बड़े आॅपरेशन, 63 मिलीयन आॅपरेशन मानसिक आघात से ...
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डायब्टीज़ बन रहा है दिल के रोगों का सबसे बड़ा कारण

पिछले 15 सालों से लगातार 100 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है डायब्टीज़डायब्टीज़ वालों को दिल के दौरे का दुगना ख़तराइंटरनैशनल डायब्टीज़ फैडरेशन के मुताबिक, भारत 65.1 मिलीयन डायब्टीज़ के मरीज़ों का घर है और यह आंकड़ा अगले दो दशकों में 100 मिलीयन तक पहुंचने वाला है। जीवनशैली और आबादी में बदलाव, जैनेटिक कारण, अनुचित आहार और आलसी जीवनशैली आदि इस के प्रमुख कारण हैं। वैसे तो डायब्टीज़ के लक्ष्ण प्रत्यक्ष नहीं होते और इसका पता नहीं चलता लेकिन हमारी सेहत और शरीर पर पड़ने वाले इसके प्रभाव को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। डायब्टीज़, दिल के रोगों और स्ट्रोक जैसी बीमारियों का सीधा खतरा है। यहां तक कि तीन में से दो डायब्टीज़ पीड़ि‍त इन दोनों से किसी रोग से ही मरते हैं। फिर भी देश में 50 प्रतिशत डायब्टीज़ के मामलों की जांच ही नहीं होती और इनका इलाज बहुत देर से हो पाता है। इस बार 'बीट डायब्टीज़' की थीम ...
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शहरी महिलाओं में दिल के रोग बन रहे हैं मौत और विकलांगता के कारण

तीन साल पहले के मुकाबले भारत में शहरी महिलाएं को इन दिनों दिल के रोगों का गंभीर ख़तरा है। इसके कारणों में अत्यधिक टरांस फैट, चीनी और नमक वाला आहार लेना, बहुत कम शारीरिक व्यायाम, बढ़ता तनाव, शराब और सिगरेट जैसे हानिकारक पदार्थों की लत सहित अन्य कई चीज़ें शामिल हैं। दिल के रोगों का ख़तरा सबसे ज़्यादा 35 से 44 साल की उम्र की महिलाओं को है। इन रोगों का ख़तरा घरेलु महिलाओं को भी उतना ही है जितना कामकाजी महिलाओं को है। इन रोगों के ख़तरे में लो एचडीएल और हाई बीएमआई दो ऐसे बेहद आम कारण है जो महिलाओं में दिल के रोगों का ख़तरा 35 साल की छोटी उम्र में भी बढ़ा देते हैं।Heart Disease in Urban Womenइस बारे में जानकारी देते हुए हार्ट केयर फाउंडेशन आॅफ इंडिया के अध्यक्ष एवं आईएनए के आॅनरेरी सेक्रेटरी जनरल डाॅ केके अग्रवाल ने बताया, "पुरूषों के मुकाबले महिलाओं में दिल के रोगों की मौजूदगी ही इसके पता चलने को औ...
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सेहतमंद दिल के लिए समझदारी से चुनें खाना पकाने वाला तेल

विभिन्न खाने के तेलों के विलक्ष्ण तत्व मिला कर बनाया जा सकता है दिल की बीमारियों से बचने का सुरक्षा कवच21वीं सदी के भारतीयों द्वारा ग़ैर-सेहतमंद जीवनशैली की आदतों की वजह से देश में दिल के रोगों की संख्या तेज़ी से बढ़ती जा रही है। पूरा दिन बैठे रहना, असंतुलित आहार, अत्यधिक तनाव इस समस्या को और भी बढ़ावा देते हैं। इस वक्त रक्त धमनीयों के रोगों की रोकथाम और इन्हें ठीक करने की बेहद आवश्यकता है, क्योंकि यह देश में तेज़ी से बढ़ रहे दिल के रोगों में से एक है। यूं तो पूरी जीवनशैली को बेहतर बनाना कई मामलों में फायदेमंद हो सकता है लेकिन घर में खाना पकाने का तेल बदलने से ही आप दिल के रोगों से बच सकते हैं।Choose Healthy Cooking Oils for Healthy Heartहमारे देश में खाना पकाने का तेल हर घर का ज़रूरी हिस्सा है और आहार के लिए ज़रूरी फैट का अह्म स्रोत है। जिन तेलों में बुरा काॅलेस्टराॅल सैचुरेट...
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बच्चों में पाए जाने वाले दिल के रोग और उनका इलाज

डाॅ केके अग्रवाल*भारत दिल के रोगों में दुनिया की राजधानी बनने के करीब पहुंच चुका है। 21वीं सदी की जीवनशैली की अनियमितताएं और तनाव से 30 साल की उम्र तक के लोगों में दिल के रोग आम हो रहे है। लेकिन छोटे बच्चों में भी दिल के रोगों के मामले बढ़ते जा रहे हैं। जन्मजात दिल के रोग आम तौर पर पाए जाते हैं। बच्चों मे दिल के रोग जन्मजात भी हो सकते हैं और बाद में भी हो सकते हैं।Heart Problems in Childrenजन्मजात दिल के रोगदेश मे 125 में से एक यानि 1 प्रतिशत बच्चे जन्मजात दिल की बीमारी से पीड़ित होते हैं जिन्हें 'ब्लू बेबीज़' कहा जाता है। एक समय था जब इसका कोई इलाज नहीं था और डाॅक्टर उसे बच्चे की किस्मत कह कर पेरेंट्स को जानकारी देते थे। लेकिन पिछले कुछ दशकों में मेडिकल क्षेत्र में हुए विकास के मद्देनज़र सर्जरी के बाद जन्मजात दिल के रोग वाले बच्चे भी आम बच्चों की तरह ज़िंदगी गुज़ार सकते हैं।जन्मज...
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लंबी बीमारियों में मददगार साबित हो सकता है योग

योग से हाईपरटैंशन, डायब्टीज़ और दिल से जुड़ी समस्याओं में लाभ मिल सकता हैपिछले साल दिसंबर में युनाईटेड नेशनस की जनरल एसेंबली ने 21 जून को अंतराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। योग 5000 साल पुराना शारीरिक, मानसिक और अध्यात्मिक अभ्यास है जिसका मकसद मन, मस्तिष्क और आत्मा को रूपांतरित करना है। पिछले कुछ दशकों में, योग को पूरी दुनिया के लोगों ने तंदुरुस्ती और स्वास्थय की पवित्र पद्धति के रूप में अपनाया है। अपने स्थापित स्वास्थ्य लाभों की वजह से, एलोपैथिक दवाओं के साथ ही अब डाॅक्टर बहुत बढ़-चढ़ कर मनोदैहिक और शरीर को कमज़ोर करने वाली पुरानी बीमारियों से जूझ रहे मरीज़ों को योग करने की सलाह देने लगे हैं। मेडिटेशन यानि ध्यान से तनाव कम हाेता जिससे हाई ब्लड प्रैशर से आाराम मिलता हैयोग उन बीमारियों से निपटने में काफी कारगर है, जिनमें मानसिक और सामाजिक कारण जैसे कि तनाव...