Sunday, August 7

punjabi film review

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Film Review | सरदारजी 2

दीप जगदीप सिंहरेटिंग 1/5सबसे पहले बात यह कि सरदारजी 2 का पहले भाग से कोई लेना-देना नहीं है। इस लिए इसमें ना भूत पकड़ने वाला है, ना बोतल में बंद शरारती भूत हैं, ना ही हसीन भूतनी है और ही भूत पकड़ने का चक्कर है।   इस बार जगजीत सिंह उर्फ जग्गी खूह वाला (दिलजीत दोसांझ) एक सफल किसान बना है। प्राकृतिक तरीके से खेती करके उसने कई पुरस्कार जीते हैं और मनमौजी दिखने वाले जग्गी के बेकाबू गुस्से से सारा गांव वाकिफ़ है। गुस्से में वह कोई ना कोई पंगा करता ही रहता है और इस बार का पंगा उसे कुछ ज़्यादा ही महंगा पड़ गया है। उसे या तो छह महीने में अपनी पुश्तैनी ज़मीन, जिसके ज़रिए पूरे गांव को, पानी मिलता है वह छोड़नी होगी या फिर डेढ़ करोड़ हर्जाना भरना होगा। बस फिर क्या था अपनी ज़मीन और गांव की खेती बचाने के लिए वह डेढ़ करोड़ का इंतज़ाम करने उड़ जाता है आॅस्ट्रिेलिया। वहां जाकर भी मुसीबतें उसका पीछा नहीं छोड़ती। क्या व...
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Film Review | ज़ोरावर (पंजाबी)

दीप जगदीप सिंहरेटिंग 1.5/5ज़ोरावर एक ओर ऐसी पंजाबी फिल्म है जो सितारे की शोहरत की भेंट चढ़ गई है, इस सितारे का नाम है यो यो हनी सिंह। दिलजीत की फिल्म अंबरसरिया के बाद 2016 में रिलीज़ हुई यह दूसरी फिल्म है जिसे पूरी तरह से पकाया नहीं गया। इस वजह साल की जिस फिल्म का सबसे ज़्यादा बेसब्री से इंतज़ार हो रहा था वह एक हंसी का बहाना बन के रह गई है।   ज़ोरावर सिंह (यो यो हनी सिंह) सीक्रेट आर्मी फोर्स का धुआंधर फौजी है जो अकेला ही ख़तरनाक मिशन पर चला जाता है, यहां तक कि वह अपने अफसरों तक की प्रवाह नहीं करता। वह पंजाब के किसी गांव में अपनी मां (अचिंत कौर) के साथ रहता है और एक दिन गांव आने पर उसे पहली ही मुलाकात में जसलीन (पारूल गुलाटी) से प्यार हो जाता है। इससे पहले के दोनों के प्यार की गाड़ी पटरी पर सरपट दौड़ पाती एक दिन अचानक शीतल को अपने खोए हुए पति और ज़ोरावर के असली पिता, समरजीत (मुकुल...
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Film Review | बठिंडा एक्सप्रैस (पंजाबी)

दीप जगदीप सि‍ंह -रेटि‍ंग 3/5 खुद को जीतने की कहानी है बठिंडा एक्सप्रैस। वक्त, हालात और फैसलों के थपेड़े जब इंसान को घुटनों पर ला देते हैं तो कैसे सपनों, हौसलों और आत्मचिंतन के पंखों से वह अपना आसमान वापिस हासिल कर सकता है यही कहती है बठिंडा एक्सप्रैस।   इंदर (दीप जोशी) बठिंडा के एक गांव एक साधारण लड़का है दौड़ना जिसका जुनून भी है और इशक भी। इतना दौड़ता है कि प्रैक्ट्सि करने के लिए स्टेडियम जाना हो या गर्लफ्रैंड गुरलीन (जैसमीन) के अचानक बने फिल्म देखने के मूड का ख़्याल रखना हो, अपनी प्यारी बुलेट से ज़्यादा उसे अपनी दौड़ पर भरोसा है। उसकी दौड़ने की ललक की वजह से उसके कोच (तरलोचन सिंह) ने उसका नाम बठिंडा एक्सप्रैस रखा है। उसकी दौड़ और सपनों के साथी हैं उसके दोस्त मोहित भास्कर और विजय एस कुमार। इंदर का भोलापन, खिलंदड़ी हंसी, गजब का आत्म-विश्वास और लम्हा कुछ कर दिखाने का जज़बा उसे भीड...