Friday, August 12

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Film Review | उड़ता पंजाब

बस कर टो... टो... टाॅमी सिंह-दीप जगदीप सिंह-रे​टिंग 3/5उड़ता पंजाब एक शानदान फिल्म तो नहीं है लेकिन जानदार फिल्म ज़रूर है, वो भी अपने जानदार किरदारों की वजह से। फिल्म में एक समुचित कहानी ना होने की वजह से यह केवल किरदारों की आंतरिक और बाहरी उथल-पुथल को पर्दे पर उतारती हुई बताती है कि कैसे नशा इन किरदारों की ज़िंदगी को एक अंधे कुएं की ओर धकेल रहा है।   जिस राजनैतिक उठापटक ने फिल्म को विवादित बना दिया था फिल्म का उससे दूर-दूर तक कोई नाता है। अगर कहूं कि फिल्म रत्ती भर भी राजनैतिक नहीं है तो गल्त नहीं होगा।फिल्म चार किरदारों टाॅमी सिंह (शाहिद कपूर ) , सरताज (दिलजीत दोसांझ) , पिंकी कुमारी (आलिया भट्ट) और डाॅ. प्रीत साहनी (करीना कपूर) के गिर्द घूमती है। टाॅमी पंजाब के एक चर्चित राॅकस्टार से पूरी तरह मेल खाता राॅकस्टार है, जो नशे की में धुन इत्तेफाक से कुछ ऐसी धुनें बना गया है ...
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उड़ता पंजाब : सियासत, सेंसर और बाज़ार

-दीप जगदीप सिंह-कभी बिहार तो यूपी तो कभी पंजाब...सियासत से लेकर बाज़ार सब मिल कर प्रस्थितियों को भुना लेना चाहते हैं। पंजाब गर्त में जा रहा है। भ्रूण हत्या के मामले में लिंग अनुपात में सबसे निचले पायदान पर... यानि लड़कियों का भवष्यि खतरे में है। हर रोज़ दो से तीन किसान खुदकुशी कर रहे हैं, यानि उनका भविष्य भी अंधकारमय है। व्यपारी, दुकानदार से लेकर मज़दूर सब बेहाल हैं। कहीं काम धंधा नहीं है, रोज़गार नहीं है। पंजाब का युवा तंग आकर विदेश के जहाज़ में बैठने के लिए आतुर है। जिसके पास पैसा या ज़मीन है वह कुछ ना कुछ जुगाड़ लगा कर उड़ रहा है। जिसके पास कोई जुगाड़ नहीं है वह 'चिट्टा' (हीरोईन) पीकर यहीं उड़ने की फीलिंग ले रहा है।अगले साल पंजाब में चुनाव आने वाले हैं, अकाली दल भाजपा की हालत पतली है, गांव-गांव में 'आप' का डंका बज रहा है, हर किसी को लग रहा है आप सफैद और हरी के बाद पंजाब में किसी 'नए रंग...