Sunday, August 7

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अनिल कपूर को आता है दूसरों की जलाने में मज़ा!
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अनिल कपूर को आता है दूसरों की जलाने में मज़ा!

अपने झक्कास अंदाज़ के लिए जाने जाते सदाबहार अभिनेता अनिल कपूर ने अपनी जवानी के दिनों के अपने दिलफेंक अंदाज़ के बारे में रोमांचक ख़ुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि चढ़ती जवानी में कैसे वह बस लड़कियों के चक्कर में पड़े रहते थे और उनकी तमन्ना थी कि उनकी बहुत सारीं गर्लफ्रेन्ड्ज़ हों, लेकिन उनकी यह तमन्ना पूरी ना हो सकी, क्योंकि बहुत जल्दी उनकी शादी हो गई!   अपनी जवानी के दिनों के किस्से, उन दिनों की प्रेमिकाओं के चक्कर, कैसे वह लड़कियों के चक्कर में पड़े रहते थे, उन्होंने स्लमडॉग मिलेनेयर फ़िल्म क्यों साईन की और अब उनके बच्चे कैसे उनका मज़ाक उड़ाते हैं, ऐसे कई रोचक खुलासे हमेशा युवा दिखने वाले और आज भी कईयों की धड़कने तेज़ कर देने वाले अनिल कपूर ने यूटयूबर हनी चवन के साथ एक अतरंग मुलाकात में किए हैं।उन्होंने माना कि वह अपने स्टाईल पर और भी अधिक ध्यान देते अगर उनकी बच्चे उनके आसपास नहीं होते। उनके बच्...
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Film Review | Phillauri

फिलौरी : फिलौर की धरोहर की पैसेंजर ट्रेनदीप जगदीप सिंहRating 2/5Cast - Anushka Sharma, Diljit Dosanjh, Suraj Sharma, Raza MuradWriter - Avnita Dutt | Director - Anshai Lalकुछ फिल्में उतनी ही मज़ेदार होती हैं, जितनी वह ट्रेलर में नज़र आती हैं। ऐसी फिल्में ट्रेलर में जितनी हट के लगती हैं, बस उतनी ही हट के होती हैं।   ख़ास कर तब जब इन हट के लगने वाली फिल्मों के लिए माहौल ज़ोरदार प्रमोशन से बनाया जाए। ऐसी फिल्मों को बेहद उम्मीद लेकर देखना आम तौर पर जोखिम भरा होता है। फिलौरी ऐसी ही ओवर हाईप्ड हटके फिल्म है जिसे ट्रेलर से आगे देखना भारी पड़ सकता है।रईसज़ादा रैपर कनन (सूरज शर्मा) तीन साल कैनेडा में रहने के बाद अपनी बचपन की प्रेमिका अनु (महरीन कौर पीरज़ादा) से शादी करने के लिए अमृतसर लौटता है। अभी वह जहाज़ में सोते हुए सपने में ही घोड़ी चढ़ा है कि उसे अपनी शादी में आने वाली बाधाएं नज़र आने लगी हैं। बं...
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उड़ता पंजाब : सियासत, सेंसर और बाज़ार

-दीप जगदीप सिंह-कभी बिहार तो यूपी तो कभी पंजाब...सियासत से लेकर बाज़ार सब मिल कर प्रस्थितियों को भुना लेना चाहते हैं। पंजाब गर्त में जा रहा है। भ्रूण हत्या के मामले में लिंग अनुपात में सबसे निचले पायदान पर... यानि लड़कियों का भवष्यि खतरे में है। हर रोज़ दो से तीन किसान खुदकुशी कर रहे हैं, यानि उनका भविष्य भी अंधकारमय है। व्यपारी, दुकानदार से लेकर मज़दूर सब बेहाल हैं। कहीं काम धंधा नहीं है, रोज़गार नहीं है। पंजाब का युवा तंग आकर विदेश के जहाज़ में बैठने के लिए आतुर है। जिसके पास पैसा या ज़मीन है वह कुछ ना कुछ जुगाड़ लगा कर उड़ रहा है। जिसके पास कोई जुगाड़ नहीं है वह 'चिट्टा' (हीरोईन) पीकर यहीं उड़ने की फीलिंग ले रहा है।अगले साल पंजाब में चुनाव आने वाले हैं, अकाली दल भाजपा की हालत पतली है, गांव-गांव में 'आप' का डंका बज रहा है, हर किसी को लग रहा है आप सफैद और हरी के बाद पंजाब में किसी 'नए रंग...
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Film Review । Dilwale । दिलवाले

 दीप जगदीप सिंह । रेटि‍ंग 2.5/5फिल्म में दिलवाले हैं लेकिन उनकी कोई कहानी नहीं। मोहब्बत तो है लेकिन दीवानगी नहीं। रोहित शैट्टी ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में फिल्म में एक्शन और कॉमेडी के साथ रोमांस   और ड्रामा का तड़का तो भरपूर लगाया है लेकिन वह एक सधी हुई कहानी परोसना भूल गए। पर्दे पर रंग हैं, हंसी है, धमाका है, मस्ती है, लेकिन रूह नहीं है। यहां तक के यह फिल्म अपने टाइटल को भी जस्टीफाई नहीं कर पाती। बुलगारिया के डॉन रणधीर (विनोद खन्ना) का बेटा राज उर्फ काली (शाहरूख ख़ान) 15 साल पहले ख़ुद भी डॉन हुआ करता था। एक दिन अचानक वह मीरा (काजोल) से टकरा जाता है और उसकी मोहब्बत में बह जाता है लेकिन एक मोड़ पर जाकर दोनों आपस में टकरा जाते हैं तब पता चलता है कि वह रणधीर के दुश्मन मलिक (कबीर बेदी) की बेटी है। दोनों के रास्ते ऐसे अलग होते हैं कि राज सब कुछ छोड़ कर गोआ में आकर कार मोडिफाई करने ...
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Film Review । हेट स्टोरी 3

दीप जगदीप सिंहनफरत की थीम पर बनी हेट स्टोरी 3 में नफरत कम, पैसे और हवस की भूख ज़्यादा है, बावजूद इसके विक्रम भट्ट की कहानी में सस्पेंस आखिर तक बना रहता है कि आखि़र यह सब हो क्यों रहा है और इसके पीछे कौन है, लेकिन यह फिल्म हेट स्टोरी से ज़्यादा रेस स्टोरी लगती है, जिसमें दो भाई अपनी चालाकी की रफ्तार से एक दूसरे को मात देने पर आमादा हैं। इसमें नायिका केवल मोहरे की तरह इस्तेमाल होती है, जबकि हेट स्टोरी सीरीज़ की पहली दो फिल्मों में मूल कथानक औरत द्वारा नफरत और बदले की भावना से प्रेरित होकर किसी भी हद तक चले जाने के गिर्द स्थापित किया था। यही इसकी यूनीकनेस्स थी। नफरत और बदले की चर्म सीमा पुरूषों में भी हो सकती है अपनी सीरिज़ की पहली फिल्मों से हटके करने की कोशिश में हेट स्टोरी थ्री उस भीड़ में शामिल होकर रह जाती है जहां ऐसी अनंत फिल्में भरी पड़ी है।कहानी बिल्कुल सिंपल है एक छोटा भाई है आदित्य ...
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Film Review । प्रेम रत्न धन खोयो !

दीप जगदीप सिंहसलमान ख़ान जैसा बड़ा सितारा, सूरज बड़जात्या जैसा नामचीन निर्देशक, हॉलीवुड की धड़ल्लेदार निर्माता कंपनी फॉक्स स्टार, कभी सबसे भद्दे फैशन के लिए चर्चित हुई सोनम कपूर जो अब अपनी पीआर के दम पर फैशन दीवा है, पिटा हुआ ग्रे शेड कलाकार नील नीतिन मुकेश, खुद का ‘जानी दुशमन’ अरमान कोहली, दर्जन के करीब ठूंसे हुए गाने, राजस्थान के ऐतिहासिक महल, अयोध्या के घाट और मंडप, कुछ चुलबुले वन लाईनर, कुठ भावुक संवाद, अनंत रंग, विहंगम दृश्य, यूपी-बिहार की बोली का तड़का, एक और सलमान ख़ान (अरे डबल रोल है ना!) नो फैमिली, जस्ट फैब्रिकेटेड इमोशन एंड ड्रामा, लाईन चाहे फिल्म की अवधी जितनी लंबी है, लेकिन एक ही लाईन में बताना तो हो बस यही है प्रेम रत्न धन खोयो ओह! आई मीन पायो…Film Review | Salman Khan | Sonam Kapoor | Prem Rattan Dhan Payoप्रेम दिलवाला (सलामन ख़ान) अध्योध्या में अपनी नाटक मंडली चलाता, रामलीला...
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Film Review । कैसी है ये हमारी अधूरी कहानी !

दीप जगदीप सिंहक्यों हिंदी फिल्मों में 'हमारी अधूरी कहानी' मर कर ही पूरी होती है? क्यों हमारे यहां प्यार जीते जी हासिल नहीं होता? क्यों प्रेमियों के चेहरे पर मुस्कुराहट मरने के बाद ही आती है? सबसे बड़ा सवाल के क्यों प्रेमी मरने के लिए हर पल तैयार रहते हैं? मोहित सूरी की 'हमारी अधूरी कहानी' एक बार फिर उसी स्टीरियोटाइप को स्थापित करने की कोशिश करती है कि हमारे देश में प्रेम और प्रेमी परंपराओं के बंधनों में बंधे हुए हैं और उन्हें प्रेम को हासिल करने के लिए मौत को गले लगाना ही होगा। यही नहीं उनकी आत्माएं तभी मिलती हैं जब दोनों प्रेमियों के अवशेष एक ही जगह पर मिलते हैं। इक्कसवीं सदी में प्रेम चाहे टवीटर और वट्स एप में सिमट गया है। प्रेमियों और प्रेम के मिलन के लिए साधन और संभावनाएं बढ़ गई हैं। प्रेमी को प्रेमिका की एक झलक पाने के लिए अब कई दिन इंतज़ार नहीं करना पड़ता, जब दिल किया तभी तुरंत ताज...