Tuesday, June 28

politics

बेरोज़गारी का सबसे बड़ा सच, कितने रोज़गार घटे, कितने लोग हुए बेहाल
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बेरोज़गारी का सबसे बड़ा सच, कितने रोज़गार घटे, कितने लोग हुए बेहाल

2019 के लोक सभा चुनाव (Lok Sabha Election 2019) जैसे-जैसे अपने चर्म पर पहुंच रहा है, चुनाव प्रचार भी तीखा होता जा रहा है। गौरतलब है कि बेरोज़गारी में रिकार्ड तोड़ बढ़ौतरी के बारे में एनएसएसओ (NSSO) द्वारा तैयार की गई सर्वे रिपोर्ट 19 दिसंबर 2018 को जारी होने वाली थी, जिसे सरकार ने छापने से रोक दिया, इसी दौरान यह रिपोर्ट लीक हो गई, जिस के बाद नीति आयोग (NITI Ayog) के वाईस चेयरमैन राजीव कुमार ने कहा कि सरकार की मंज़ूरी के बाद ही मार्च 2019 में रिपोर्ट जारी की जाएगी। मार्च क्या अब तो मई भी आधा गुज़र गया है रिपोर्ट जारी नहीं हुई और अगर दोबारा सरकार आती भी है तो इस रिपोर्ट के जारी होने की कोई संभावना नहीं है।6 मार्च 2019 को रायटर्ज़ के हवाले से टैलीग्राफ़ में छपी ख़बर में सेंटर फॉर मोनीटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई, CMIE) की रिपोट प्रकाशित की गई। इस रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी 2019 में बे...
उनकी नीयत बनाम जियो की नीयति
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उनकी नीयत बनाम जियो की नीयति

जियो इंस्टीच्यूट के पैदा होने से पहले ही उसे ‘इंस्टीच्यूट ऑफ एमिनेंस’ का तमगा देने पर बवाल मचा हुआ है, जियो इंस्टीच्यूट की नियति क्या होगी यह तो भविष्य तय करेगा, लेकिन इस फ़ैसले ने सरकार की देश की शिक्षा नीति और देश के नौजवानों के भविष्य को लेकर नीयत एक बार फिर साफ़ कर दी है। एक तरफ़ सरकार ने जहां 17 दिग्गज़ों की कमेटी बना कर उन्हें भारत के इतिहास का भगवाकरण करने के काम पर लगाया हुआ है तो दूसरी तरफ़ तेज़ी से समूचा शिक्षा ढांचा और नीति कॉरपोरेट और निजी फ़ायदे के अनुरूप ढाली जा रही है। ऐसे में जियो इंस्टीच्यूट के नामो निशान तक ना होने के बावजूद उसे उत्कषर्टता का अस्थायी दर्जा देना भी हैरान करने वाली बात नहीं है। बल्कि इस कदम से सरकार ने तो खुले तौर पर ऐलान कर दिया उसकी शिक्षा नीति की दिशा और दशा क्या होगी और उसे किससे हित सर्वोपरि हैं। क्या है भला क्या है इंस्टीच्यूट ऑफ एमिनेंस है? जाननें के लिए क्...
जियो का बवालः भला क्या है इंस्टीच्यूट ऑफ एमिनेंस है?
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जियो का बवालः भला क्या है इंस्टीच्यूट ऑफ एमिनेंस है?

देश के शिक्षण संस्थानों को दुनिया के टॉप 100 की सूची में लाने के लिए केंद्र सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय ने एक योजना बनाई है, जिसके तहत देश के 20 शिक्षण संस्थानों को इंस्टीच्यूट ऑफ एमिनेंस का दर्जा दिया जा रहा है। इसके लिए यूजीसी द्वारा बनाई गई एम्पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी (ईईसी) ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों से आवेदन मांगे गए थे। उत्कर्षट संस्थान का दर्जा पाने के लिए देश के कुल 114 संस्थान दौड़ में शामिल हुए, जिन में 11 सेंट्रल यूनिवर्सिटीज़, 27 राष्ट्रीय महत्व के उच्च शिक्षण संस्थान, आईआईटीज़ एवं एनआईआईटीज़ आदि, 27 राज्य यूनिवसिर्टीज़ और 10 प्राईवेट यूनिवसिर्टीज़ शामिल हुईं। प्राईवेट इंस्टीच्यूट्स में ऐयरटेल की भारती यूनिवर्सिटी (सत्या भारती फाउंडेशन), दिल्ली, अनिल अग्रवाल की वेदांता यूनिवर्सिटी, ओडिशा, करिया यूनिवर्सिटी, इंडियन स्कूल ऑफ बिज़नेस हैदराबाद, इंडस टेक यूनिवर्सिटी दिल्ली, अचार्य इंस्टीच...
जब राजीव गांधी ने 1984 के कत्लेआम को ठहराया जायज़!
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जब राजीव गांधी ने 1984 के कत्लेआम को ठहराया जायज़!

करीब 33 साल गुज़र जाने के बाद भी 1984 में हुए सिख कत्लेआम के लिए आज तक कोई इंसाफ़ नहीं मिल पाया है। इस दौरान चाहे केंद्र में कांग्रेस सरकार रही हो या ख़ुद का पंथ का पहरेदार कहने वाली शिरोमणि अकाली दल के समर्थन वाली पार्टी भारतीय जनता पार्टी की सरकार आई हो,   सिख समुदाय को इंसाफ़ दिला पाने में आज तक कोई भी इच्छा शक्ति नहीं दिखा पाया है। अदालतों में तीन दशक से ज़्यादा केस चलने के बाद और अनेक कमिशनों की रिपोर्टों सौंपे जाने के बाद भी मामले जहां के तहां अटके हुए हैं। दिल्ली और पंजाब के साथ-साथ देश में जब भी चुनाव हों इन मामलों पर राजनीति तो की जाती है, लेकिन अमली रूप में इंसाफ दिलाने के लिए कुछ नहीं किया जाता, बस कुछ मुआवज़ा देकर सहानुभूति बटोर ली जाती है।ऐसे में कत्लेआम के बहाने होती राजनीति में ऐसे बयान दागे जाते हैं जो पीड़ितों के सीने फिर से छलनी कर देते हैं। लेकिन पूर्व दिवंगत प्रधानमंत...
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Punjab Election 2017 | पंजाब चुनाव विश्लेषण । कौन जीता, दल या रणनीति?

करीब दो महीने तक पशोपेश की स्थिति को समाप्त करते हुए 11 मार्च 2017 को पंजाब के चुनाव परिणाम आ ही गए, जिस में 77 सीटों की मजबूत जीत के साथ कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में कांग्रेस ने पंजाब की राजनीति में वापसी कर ली है।  सोशल मीडिया पर जीत का ऐलान कर चुके आम आमदी पार्टी समर्थकों को जहां 22 सीटों से संतोष करना पड़ा, वहीं शिरोमणि अकाली दल-भाजपा गठबंधन को 18 सीटें ही मिल सकीं। इन चुनावी नतीजों से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि अकाली दल को सिर्फ ब्रेक दिलाई गई है, उसके मूल आधार को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है (अकाली दल का वोट प्रतिशत कभी भी 25 फीसदी से नीचे नहीं गया, जो इस बार भी कायम है)। शायद शिअद को चुनाव प्रचार के दौरान जमीनी स्तर पर सत्ता खिसकती हुई नजर आ गई थी और उसने बहुत सोची-समझी योजना के तहत अंदरखाते (कई जगह खुल कर भी) कांग्रेस के साथ मिल कर चुनावी बिसात बिछाई, जो पूरी तरह कामयाब रही। ...
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पांच राज्यों में घोषित हुए चुनाव, 4 फरवरी को पहला चरण, 11 मार्च को आएंगे नतीजे

मुख्य निर्वाचन आयुक्त नसीम जैदी ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेस कर 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया। पंजाब, गोवा और उत्तराखंड में एक चरण में चुनाव होगा। मणिपुर में दो चरणों में चुनाव होगा। बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में सात चरणों में चुनाव होगा। उत्तर प्रदेशः सात चरणों में मतदान पहले चरण में 73 सीटों के लिए 11 फरवरी के लिए मतदान दूसरे चरण में 67 सीटें के‌ लिए 15 फरवरी को मतदान तीसरे चरण की 69 सीटों के लिए 19 फरवरी को मतदानचौथे चरण की 53 सीटों के लि‌ए 23 फरवरी को मतदानपांचवे चरण की 52 सीटों के लिए 27 फरवरी को मतदानछठवें चरण की 43 सीटों के लिए 4 मार्च को मतदानसातवें चरण की 40 सीटों के लिए 8 मार्च को मतदानगोवाः एक चरण में मतदान सीटः 40चुनावः 4 फरवरी को  पंजाब: एक चरण में मतदानसीटः 117चुनावः 4 फरवरीउत्तराखंडः एक चरण में मतदानसीटः 70चुनावः 15 फरवरी मणिपुर: दो चरणों...
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जनचेतना-धार्मिक संगठन टकराव मामले में पुलिस द्वारा 24 घंटे में कार्यवाही का भरोसा

लुधियाना (ब्‍यूरो) : पंजाबी भवन स्थित जनचेतना पुस्तक ब्रिकी केंद्र के प्रबंधकों और धार्मिक संगठन के मध्य 'नास्तिक' पुस्तकों को लेकर हुए टकराव के मामले में मंगलवार को पुलिस ने हंगामाकारियों के खि़लाफ़ 24 घंटे में कार्यवाही करने का भरोसा दिलाया है।   मंगलवार सुबह लुधियाना के विभिन्न इंकलाबी संगठनों के आह्वान पर मज़दूरों, युवाओं, विद्यार्थियों के संगठनों द्वारा थाना डिवीज़न नम्बर 5 का घेराव कर रोष प्रदर्शन किया गया और 2 जनवरी को जनचेतना के प्रबंधकों और ब्रिकी केंद्र पर हुए टकराव की घटना के लिए ज़िम्मेदार कट्टड़पंथी संगठन के हमलावरों को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन कर रहे संगठनों ने धर्म के आधार पर लोगों को बांटने वाले संगठनों पर पाबंदी लगाने और दोषियों के खि़लाफ़ सख़्त कार्यवाही करने की मांग भी की गई। मौके पर पहुंचे उच्च पुलिस अधिकारियों ने कार्यावाही के लिए 24 घंटे का समय मांगे पर जाने ...
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कन्हैया कुमार के 6 ज़ोरदार हमले!

पूर्व जेएनयू स्‍टूडेंट और युवा सीपीआई नेता कन्‍हैया कुमार के लुधियाना आने की ख़बर आते ही यहां पंजाबी भवन के आसपास तनाव का माहौल बना हुआ था। लुधियाना बार एसोसिएशन से जुड़े कुछ वकीलों ने उनके लुधियाना आने के विरोध में प्रदर्शन करने की चेतावनी दे रखी थी। जिससे देखते हुए सुबह से पंजाबी भवन को छावनी में तब्‍दील कर दिया गया। करीब 12 बजे कन्‍हैया के पंजाबी भवन पहुंचने के बाद सुरक्षा चाक-चौबंद कर दी गई। पंजाबी भवन की ओर आती सड़क पर बैरीकेट लगा कर प्रदर्शनकारी वकीलों को रोक दिया गया, उन्‍होंने वहीं पर धरना दिया। कुछ देर उन्‍हें पुलिस वैन में बिठा कर पुलिस ले गई। कन्‍हैया कुमार ने लुधियाना के पंजाबी भवन में सोशल थिंकर्ज़ फोरम एवं पंजाबी साहित्‍य अकादमी द्वारा महंगी शिक्षा, घटते रोज़गार विषय आयोजित की गई विचार चर्चा के दौरान भाषण देने आए थे। इस दौरान उन्होंने प्रधान मंत्री नरेंन्द्र मोदी, उनकी सरकार...
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उड़ता पंजाब : सियासत, सेंसर और बाज़ार

-दीप जगदीप सिंह-कभी बिहार तो यूपी तो कभी पंजाब...सियासत से लेकर बाज़ार सब मिल कर प्रस्थितियों को भुना लेना चाहते हैं। पंजाब गर्त में जा रहा है। भ्रूण हत्या के मामले में लिंग अनुपात में सबसे निचले पायदान पर... यानि लड़कियों का भवष्यि खतरे में है। हर रोज़ दो से तीन किसान खुदकुशी कर रहे हैं, यानि उनका भविष्य भी अंधकारमय है। व्यपारी, दुकानदार से लेकर मज़दूर सब बेहाल हैं। कहीं काम धंधा नहीं है, रोज़गार नहीं है। पंजाब का युवा तंग आकर विदेश के जहाज़ में बैठने के लिए आतुर है। जिसके पास पैसा या ज़मीन है वह कुछ ना कुछ जुगाड़ लगा कर उड़ रहा है। जिसके पास कोई जुगाड़ नहीं है वह 'चिट्टा' (हीरोईन) पीकर यहीं उड़ने की फीलिंग ले रहा है।अगले साल पंजाब में चुनाव आने वाले हैं, अकाली दल भाजपा की हालत पतली है, गांव-गांव में 'आप' का डंका बज रहा है, हर किसी को लग रहा है आप सफैद और हरी के बाद पंजाब में किसी 'नए रंग...
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कन्हैया के नाम एक खुला खत

कन्हैया कुमार! जब से तुमने जेएनयू परिसर से आज़ादी की हुंकार भरी है, पूरा देश तुम्हारी ओर बेहद उम्मीदों से देख रहा है। जब कुछ चैनलों ने तुम्हारे भाषण की छेड़छाड़ वाली वीडियो प्रसारित की थी तो मन कह रहा था कि घोर अन्याय हुआ है तुम्हारे साथ, जब काले कोट पहने कुछ लोगों ने तुम पर हमला किया था तो बेहद दर्द भी हुआ था।    तुमने जो इन सब दिनों में झेला है वह हमारे सिस्टम की एक बानगी दिखाता है। तुम भली भांति जानते हुए को नायक्तव वाला जो आभास इस वक्त तुम महसूस कर रहे हो, वह इस सिस्टम की ख़ामियों से ही उत्पन्न हुआ है। यह पत्र लिखने का विचार मुझे तब आया जब रवीश कुमार के साथ इंटरव्यू में तुमने कहा कि कोट छोड़ कर तुम सोच को पकड़ कर एकजुटता पैदा करना चाहते हो। ऐसा कहके तुमने उन लाल कटोरे वालों को भी नाराज़ कर दिया होगा जो किसी दूसरी सोच को प्रयोगशाला वाले चिमटे से भी उठाने की इच्छा नहीं रखते, च...