बेरोज़गारी का सबसे बड़ा सच, रोज़गार घटे, लोग हुएबेहाल

2019 के लोक सभा चुनाव (Lok Sabha Election 2019) जैसे-जैसे अपने चर्म पर पहुंच रहा है, चुनाव प्रचार भी तीखा होता जा रहा है। 

 
 
गौरतलब है कि बेरोज़गारी में रिकार्ड तोड़ बढ़ौतरी के बारे में एनएसएसओ (NSSO) द्वारा तैयार की गई सर्वे रिपोर्ट 19 दिसंबर 2018 को जारी होने वाली थी, जिसे सरकार ने छापने से रोक दिया, इसी दौरान यह रिपोर्ट लीक हो गई, जिस के बाद नीति आयोग (NITI Ayog) के वाईस चेयरमैन राजीव कुमार ने कहा कि सरकार की मंज़ूरी के बाद ही मार्च 2019 में रिपोर्ट जारी की जाएगी। मार्च क्या अब तो मई भी आधा गुज़र गया है रिपोर्ट जारी नहीं हुई और अगर दोबारा सरकार आती भी है तो इस रिपोर्ट के जारी होने की कोई संभावना नहीं है।
 
6 मार्च 2019 को रायटर्ज़ के हवाले से टैलीग्राफ़ में छपी ख़बर में सेंटर फॉर मोनीटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई, CMIE) की रिपोट प्रकाशित की गई। इस रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी 2019 में बेरोज़गारी की दर 7.2% थी जो सितंबर 2016 के बाद बेरोज़गारी की सबसे ज़्यादा दर रही, जब कि फरवरी 2018 में यह दर 5.8% थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी 2018 में 40 करोड़ 60 लाख लोगों के पास रोज़गार था जब कि एक साल बाद फरवरी 2019 में यह संख्या घट कर 40 करोड़ रह गई, यानि एक साल में करीब 60 लाख लोग बेरोज़गार हो गए।
 
2019 के लोक सभा चुनाव के प्रचार के दौरान आर-भारत हिंदी टीवी चैनल के संपादक अर्नब गोस्वामी (Arnab Goswami) को दिए अपने पहले लम्बे इंटरव्यू में बेरोज़गारी में रिकार्ड तोड़ बढ़ौतरी के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) ने इसे कांग्रेस द्वारा खेला जा रहा आंकड़ों का खेल कहा था। उन्होंने बताया था कि चार करोड़ लोगों ने मुद्रा लोन लिया है, उन्होंने कोई तो रोज़गार शुरू किया होगा। 
 
इस इंटरव्यू के बाद बिज़नस स्टेंडर्ड के पत्रकार सोमेश झा ने टवीट कर सरकार से कुछ सवाल पूछे-
 
 
 
1. आप ने रोज़गार से संबंधित अंकड़े जुटाने के लिए नीति आयोग के वाईस चेयरमैन अरविंद पनगरीया (Arvind Pangariya) की कमेटी बनाई थी। उस की रिपोर्ट अब तक जारी क्यों नहीं की गईॽ
 
2. पनगरीया पैनल ने कहा था कि भारत में रोज़गार की स्थिति का सही अंदाज़ा लगाने के लिए घर-घर सर्वे वाला तरीका सबसे ज़्यादा कारगर है और एनएसएसओ का ताज़ा सर्वे इस गैप को पूरा करता है। सभी मंज़ूरियां मिल जाने के बावजूद आप ने एनएसएसओ का लेबर फोर्स सर्वे 2017-18 अब तक जारी क्यों नहीं कियाॽ
 
3. एनएसएसओ की जो रिपोर्ट अभी तक जारी नहीं हुई, वह बताती है कि बेरोज़गारी की दर 45 सालों का रिकार्ड तोड़ते हुए 6.1% के अंकड़े तक पहुंच चुकी है। यह रिपोर्ट छुपा कर बढ़ती बेरोज़गारी का पूरा इल्ज़ाम क्या आप अपने सिर पर लेने के लिए तैयार हैंॽ
 
4. चलिए एक पल के लिए एनएसएसओ की रिपोर्ट को किनारे रख देते हैं। लेबर ब्यूरो ने अपने सालाना घर-घर सर्वे रिपोर्ट 2016-17 में बेरोज़गारी की दर 3.9% दर्शायी है, जो पिछले चार सालों में सबसे ज़्यादा है। दिसंबर में श्रम मंत्री द्वारा मंज़ूरी मिल जाने के बावजूद यह सर्वे जारी क्यों नहीं किया गयाॽ
 
5. आप ने कहा कि मुद्रा लोन से रोज़गार पैदा हुए, पर क्या बढ़ती हुई बेरोज़गारी की दर के साथ रोज़गार पैदा नहीं हो सकतेॽ बढ़ती हुई बेरोज़गारी की दर का मतलब यह नहीं कि कोई रोज़गार पैदा ही नहीं हो रहा। क्या एनएसएसओ और लेबर ब्यूरो के अलावा कोई और डाटा है जो बेरोज़गारी के बारे में जानकारी दे सकेॽ
 
सोमेश झा की बिज़नेस स्टेंडर्ड की 6 फरवरी 2019 की रिपोर्ट बताती है कि बेरोज़गारी का 45 साल का रिकार्ड तोड़ने वाली रिपोर्ट को नेशनल स्टेटिस्टिक्स कमिशन की मंज़ूरी मिल जाने के बावजूद सरकार ने इस रिपोर्ट को जारी होने से रोक दिया, इस वजह से कमीशन के दो स्वतंत्र सदस्यों तत्कालीन कार्यकारी चेयरमैन पी.सी. मोहनन और सदस्य जी.वी. मीनाक्षी ने इस्तीफ़ा दे दिया।
 
औरतों और पुरूषों में बढ़ रही है वेतन और अच्छे रोज़गार की खाई
 
 
दूसरी तरफ़ 30 मार्च 2019 को टाईम्ज़ ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित हुई ऑक्सफ़ेम (oxfam) की रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं और पुरूषों में वेतन की खाई बड़ी हो रही है और महिलाओं को अच्छी रोज़गार देने में हो रहे भेदभाव की वजह से भारतीय श्रम बाज़ार में समानता की दर लगातार घटती जा रही है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है 2011-12 की तुलना में 2016 में रोज़गार में सलाना बढ़ौतरी की रफ़्तार कम हो कर 15 लाख रह गई है यानि इन सालों में हर साल केवल 15 लाख रोज़गार ही पैदा हो सके। इस के साथ ही रोज़गार से मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा की दस जो 2011-12 में 45% थी वह कम हो कर 38% रह गई है यानि जिन लोगों के पास रोज़गार है भी उन में भी इस से प्राप्त होने वाली आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा कम हुई है।

जीडीपी बढ़ी, रोज़गार घटे
यह रिपोर्ट बताती है कि श्रम मंत्रालय (labour ministry) की 2015-16 के पांचवें सालाना रोज़गार-बेरोज़गारी सर्वे के अनुसार 77% भारतीय परिवारों में रोज़ाना कमाने वाला एक भी पारिवारिक सदस्य नहीं है। यह रिपोर्ट जीडीपी पर आधारित आर्थिक विकास पर प्रशनचिन्ह लगाते हुए कहती है कि लगातार आर्थिक विकास के बावजूद भारत में रोज़गार में बढ़ौतरी नहीं हो रही। अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट ‘स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2018’ के अनुसार 16% पढ़े-लिखे नौजवान बेरोज़गार हैं। ऑक्सफेम की रिपोर्ट बताती है कि ग्रामीण बेरोज़गार नौजवानों की दर जो 2011-12 में 5% थी बढ़ कर 2017-18 में 17.4% हो गई है।
 
नोटबंदी से घर में कमाने वालों की संख्या घटी
यह रिपोर्ट नोटबंदी से रोज़गार पर पड़े असर के बारे में भी रौशनी डालती है। रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी (demonetisation) के बाद जिन घरों में कमाने वाले दो या अधिक व्यक्ति थे उन घरों की संख्या 34.8% से घट कर 31.8% रह गई है यानि नोटबंदी (demonetisation) का असर उन परिवारों पर सबसे ज़्यादा हुआ है जिन में कमाने वाले दो या दो से ज़्यादा थे, नोटबंदी के बाद उन घरों में कमाने वाला सिर्फ़ एक व्यक्ति रह गया है। 
 
सोचने वाली बात यह है कि बेरोज़गारी (unemployment) की इतनी भयावह स्थिति होने के बावजूद रोज़गार 2019 के लोक सभा चुनाव का मुद्दा क्यों नहीं बन पायाॽ इस सवाल के जवाब की मांग हमें अपने नेताओं के साथ-साथ ख़ुद से भी करनी होगी।
 
ज़ाेरदार टाइम्ज़ एक स्वतंत्र मीडिया संस्थान है, जाे बिना किसी राजनैतिक या व्यापारिक दबाव एवं पक्षपात के आप तक ख़बरें, सूचनाएं और जानकारियां पहुंचा रहा है। इसे राजनैतिक एवं व्यापारिक दबावाें से मुक्त रखने के लिए आपके आर्थिक सहयाेग की आवश्यकता है। आप अपनी इच्छानुसार सहयाेग राशि भेज कर सहयोगी सदस्य बन सकते हैं। उसके लिए आप नीचे दिए गए बटन काे दबाएं। आप के इस सहयाेग से हमारे पत्रकार एवं लेखक बिना किसी दबाव के बेबाकी और निडरता से अपना फ़र्ज़ निभा पाएंगे। धन्यवाद।

सहयोगी सदस्य बनने के फ़ायदे

  • आप अपनी इच्छानुसार सहयोग राशि देकर सदस्य बन कर पूरा साल बिना किसी पाबंदी के पूरी वेबसाईट का सारा कंटेट पढ़, देख और सुन सकते हैं।
  • सभी सदस्य, ज़ोरदार टाईम्ज़ और सहयोगी संस्थाओं द्वारा होने वाले आयोजनों के मुफ़्त पास एवं ईनवीटेशन के विशेष पात्र होंगे।
  • समय-समय पर ख़ास तौहफ़े, सुविधाएं और विभिन्न उपयोगी ऑफर, फ़िल्म, ओटीटी, रेस्तरां आदि के कूपन सभी सदस्यों को केवल निजी सूचना के ज़रिए दिए जाएंगे।

सहयोग राशि भेजने के लिए नीचे बटन अंकित राशि (amount) चुनें या अंतिम बटन दबा कर अपनी इच्छाअनुसार राशि भर सकते हैं।


Posted

in

by

Tags:

एक नज़र ईधर भी

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page