Friday, August 12

literature

अरुंधतिरॉय का उपन्यास ‘अपार खुशी का घराना’और ‘बेपनाह शादमानी की ममलिकत’ का लोकार्पण
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अरुंधतिरॉय का उपन्यास ‘अपार खुशी का घराना’और ‘बेपनाह शादमानी की ममलिकत’ का लोकार्पण

नई दिल्ली:  विश्वप्रसिद्ध लेखिका अरुंधति रॉय के अंग्रेजी में बहुचर्चित उपन्यास ‘द मिनिस्ट्री ऑफ अटमोस्ट हैप्पीनेस’ का हिंदी अनुवाद ‘अपार खुशी का घराना’ एवं उर्दू अनुवाद ‘बेपनाह शादमानी की ममलिकत’का लोकार्पण शनिवार को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में हुआ। इस उपन्यास का हिंदी में अनुवाद वरिष्ठ कवि और आलोचक मंगलेश डबराल और उर्दू अनुवाद अर्जुमंद आरा द्वारा किया गया, उपन्यास को दोनों भाषाओँ में राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया है।लोकार्पण के बाद लेखिका अरुंधति रॉय, हिंदी अनुवादक मंगलेश डबराल और उर्दू अनुवादक अर्जुमंद आरा से वरिष्ठ लेखक संजीव कुमार एवं आशुतोष कुमार ने बातचीत की।कार्यक्रम की शुरूआत दास्तानगो दारेन शाहिदी द्वारा पुस्तक से मधुर अंशपाठ कर किया गया।इस मौके पर लेखिका अरुंधति रॉय ने कहा “ मेरी यह पुस्तक अब तक देश –विदेश के 49 भाषाओँ में अनुवाद हो चुकी है और अब हिंदी और उर्दू में ...
तेरी जाति क्या?
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तेरी जाति क्या?

नाटक की भला कोई जाति होती है क्या? लेकिन नाटक जाति के सवाल पर बहुत गंभीर विमर्श कर सकता है। ख़ास कर उस शहर में जहां पर नाटक भी अछूत माना जाता है।असल में नाटक बड़ा दमदार माध्यम है। अगर इसे जी-जान से किया जाए तो दर्शकों को अंदर तक हिला देने की कुव्वत रखता है। पंजाब में नाटकों की विभिन्न किस्म की परंपराएं रही हैं। पूरी सीरिज़ में देखता हूं तो लुधियाना शहर नाटक के बड़े केंद्र के रूप में उभरता हुआ नज़र आता है। दशक भर पहले अमृतसर में निजी प्रयास से सम्पूर्ण आॅटोमेटेड रंगमंच का आगमन हुआ। वहां अब वीकऐंड रंगमंच का चलन आम हो गया है। लोग टिकट ख़रीद कर नाटक देखने आते हैं। दिल्ली, मुंबई जैसी फीलिंग आती है।दूसरी तरफ़ लुधियाना जैसे इंडस्ट्रियल शहर का नाटक अभी भी दानियों के रहमो-कर्म और रंगमंच संस्थानों के निजी प्रयासों तक सीमित है। पंजाबी साहित्य अकाडमी का ओपन ऐयर थिएटर हौसला बढ़ाता है। लेकिन पपड़ी बन कर धीरे-...
पंजाबी कहानी । नाविक का फेरा । अमृता प्रीतम
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पंजाबी कहानी । नाविक का फेरा । अमृता प्रीतम

मर्द-औरत का रिश्ता, आदम और हव्वा के ज़माने से एक अबूझ पहेली रहा है। समाज, राजनीति, न्यास व्यवस्था, रोज़गार और अकांक्षाएं इस पहेली को और भी गहरा कर देते हैं। प्रख्यात लेखिका अमृता प्रीतम औरत-मर्द के रिश्ते और प्रेम की गहराईयों को बड़ी बेबाकी से शबदों में उतराने के लिए जानीं जाती हैं। उन्हीं की कलम से उपजी पंजाबी कहानी ‘मलाह दा फेरा’ के ज़रिए वह इस रिश्ते को यथार्थवादी पात्रों के ज़रिए एक फंतासी संसार में ले जाती हैं। कहानी के अंत तक आप यही समझते हैं कि यह हाड़-मांस के पात्र हैं, लेकिन अंतिम पंक्तियों तक आते-आते पता चलता है कि यह पात्र हमारी कल्पनाओं से उपजे हैं। क्या हैं वह कल्पनाएं, जानने के लिए पढ़िए कहानी का हिंदी अनुवाद-सागर किनारे भीड़ जमा थी। हर उम्र, मज़हब, वेषभूषा के लोग।कुछ समंदर के सीने को बड़ी ईप्सा से नज़र के आखरी छोर तक देख रहे थे। कुछ नज़रें भीड़ में इस तरह व्यस्त थी जैसे समंदर से कोई वास्...
पंजाबी कहानी । मां-बेटियां । मनमोहन बावा
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पंजाबी कहानी । मां-बेटियां । मनमोहन बावा

लड़कियों के लिए प्रेम आज भी टैबू है। वह प्रेम कर तो सकती हैं, प्रेम के बारे में बात नहीं कर सकती। लड़कियां केवल समाज से, परिवार से, मां से छिप कर ही प्रेम कर सकती हैं और फिर उसकी परकाष्ठा को वक्त और किस्मत के सहारे छोड़ देने के लिए मजबूर होती हैं। यह सच केवल ग्रामीण क्षेत्रों की ही नहीं शहरी मध्यवगीर्य लड़कियों का भी सच है। इस तरह पीढ़ी दर पीढ़ी लड़कियों के लिए प्रेम का मतलब बस घर के किसी कोने में सहेज के रखा वह ब्लैक-बाॅक्स होता है, जिसमें उसके प्रेम की समृतियां कैद है। मनमोहन बावा की पंजाबी कहानी मां-बेटियां एक अतीत के एक पुराने ब्लैक-बाॅक्स और वर्तमान में समृतियां समेट रहे नए ब्लैक-बाॅक्स के अंर्तद्वंद की ऐसी ही कहानी है। क्या इक्कसवीं सदी की मां-बेटियां मिल कर प्रेम के इस ब्लैक-बाॅक्स के अस्तित्व को कोई नया आयाम दे पातीं हैं, जानने के लिए पढ़िए कहानी का यह हिंदी अनुवाद-पिछले आठ दस दिनों स...
पंजाबी कहानी | चक दे इंडिया | बलदेव सिंह
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पंजाबी कहानी | चक दे इंडिया | बलदेव सिंह

1990 के बाद की खुली अर्थव्यवस्था के बाद देश ने जैसे ख़ुद को इंडिया और भारत में बंटते देखता है, उसे हम अनदेखा तो कर सकते हैं नज़रअंदाज़ नहीं। इंडिया में रहते हुए बीएमडब्लयू में किसी हीरोईन की कमर सी बल खाती सड़क पर जब हम किसी चैराहे पर रूकते हैं तो ना चाहते हुए भी भारत हाथ फैलाए हमारे सामने आ खड़ा होता है। इंडिया की चकाचैंध में पनप रहा यह भारत असल में कैसे अपनी ज़िंदगी जीता है, सड़कनामा के लिए चर्चित पंजाबी कथाकार बलदेव सिंह अपनी कहानी 'मैं हँस ना सका' में इस अंतरद्वंद को बाखूबी पेश करते हैं। इस कहानी का हिंदी अनुवाद 'चक दे इंडिया' आॅनलाईन पाठकों के लिए प्रस्तुत है-मुहल्ले की ख़ाली जगहों पर, वह परिवार देखते-देखते छे-सात जगह बदल चुका था। सबसे पहले उन्हें मैंने अपने घर के पिछवाड़े, खाली प्लाट में देखा। दो ही दिन में उन्होंने अपनी झुग्गी बना ली। आसपास से ईंट पत्थर जुटा कर चूल्हा जलाने के ल...
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पंजाबी कहानी | लबारी | जतिंदर सिंह हांस

आज के दौर की सबसे बड़ी त्रासदी कोई बीमारी नहीं बल्कि अकेलापन है, जो यूवा पीढ़ी से लेकर उम्रदराज़ पीढ़ी को अंदर ही अंदर खाए जा रहा है। यूवा पंजाबी कथाकार जतिंदर सिंह हांस अपनी पंजाबी कहानी लूतरो में दो पीढ़ियों के अकेलेपन को अपनी दो महिला पात्रों के ज़रिए बाखूबी पेश कर रहें हैं। सोशल मीडिया के दौर में हर पल पूरी दुनिया से जुड़ा रहने वाला आज का मानव असल में कितना अकेला है, इस कहानी के ज़रिए यह मर्म देखा जा सकता है। प्रस्तुत है लूतरो का हिंदी अनुवाद लबारी-मन करता है कमज़ात को चोटी पकड़ घर से निकाल दूं। हाथ भर की ज़बान, कैंची की तरह चलती है, इसे मैं लबारी कहती हूं। ब्लड-प्रैशर बढ़ा हो तो बहुत कुछ कह देती हूं, चिकने घड़े जैसी है, कोई फ़र्क ही नहीं पड़ता। बस हंसती रहती है। कई बार तो मेरा ब्लड प्रैशर इस बात से बढ़ जाता है कि गधे की बच्ची को इतनी हंसी आती कहां से है! फिर मुझे गोली खानी पड़ती है। कलमुंही कल न...
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जयपुर लि‍ट्ररेचर फैस्‍टीवल: उत्‍सव या तमाशा

दीप जगदीप सि‍ंह | जयपुर लि‍ट्रेचर फैस्‍टीवल खत्‍म हुए एक सप्‍ताह से ज्‍़यादा हो चुका है। पांच दि‍न की 'भीड़ भरी हवाई उड़ान' के बाद 'जैटलैग' से नि‍कलने के लि‍ए शायद एक सप्‍ताह काफी होता हो। इन सात-आठ दि‍नों में लि‍खूं या ना लि‍खूं वाली हालत लगातार बनी रही, लेकि‍न आखि‍र कब तक चुप रहूं, तमाशबीन बन कर तमाशा देखता रहूं, यही सोच कर अब तुम्‍हारे हवाले जानो तन साथि‍यो...     ख़ैर आप सोच रहें होंगे कि‍ यह तमाशा क्‍या है तो बता दूं कि‍ 2014 में ही मैंने कहीं कह दि‍या था कि‍ अब इसका नामकरन जयपुर फि‍ल्‍म, क्रि‍केट और लि‍ट्ररेचर फैस्‍टीवल कर देना चाहि‍ए, लेकि‍न अब बात उससे भी आगे बढ़ चली है क्‍योंकि‍ भीड़ के साथ-साथ मंच पर होने वाला प्रस्‍तुति‍करण भी तमाशे का रूप ले चुका है। इस बार मैं इसे ग्रेट इंडि‍यन लि‍टरेरी ग्‍लैमर्स तमाशा कहना चाहता था। आप चाहें तो बुरा मान सकते हैं लेकि‍न 'मोदी-मो...
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ज़ी जयपुर लि‍ट्ररेचर फैस्टीवल में मनेगा राजस्‍थानी संस्‍कृति‍ का जशन

दीप जगदीप सि‍ंह । साहि‍त्‍य के साथ साथ ज़ी जयपुर लि‍ट्ररेचर फैस्टीवल में इस बार राजस्‍थानी संस्‍कृति‍ का जशन भी मनेगा। साहि‍त्‍य समारोह के दौरान मीरा बाई के काव्‍य से लेकर कवांड़ की मौखि‍क परंपरा के साथ ही राजस्‍थान के पौराणि‍क गहनों का भी प्रदर्शन होगा। यानि‍ इस बार ज़ी जयपुर लि‍ट्ररेचर फैस्टीवल में राजस्‍थान की कला और संस्‍कृति‍ के रंग भी घुलेंगे।   आयोजकों काे उम्‍मीद है कि‍ इस बार 2 लाख लोग मेले का हि‍स्‍सा बनेंगे, इस लि‍ए वि‍चार उत्‍तेजक चर्चाओं के साथ ही उनके मनोरंजन के लि‍ए सांस्‍कृति‍क कार्यक्रमों का आयोजन भी कि‍या जा रहा है। पूरे आयोजन के दौरान अामेर कि‍ले और एल्‍बर्ट हाल में सांस्‍कृति‍क शामों का आयोजन होगा जि‍समें सभी भाग ले सकते हैं। ज़ी जयपुर लि‍ट्ररेचर फैस्टीवल का शुभारंभ राजस्‍थान की मुख्‍यमंत्री वसुंधरा राजे करेंगी, जबकि‍ पुरस्‍कृत लेखि‍का माग्रेट एटवुड उद्घाटनी भाषण ...
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शब्दों के समंदर में डूबने को तैयार है ग़ुलाबी ‘रेगि‍स्तान’

दीप जगदीप सि‍ंह । ज़ी लि‍ट्ररेचर फैस्टीवल देश दुनि‍या में साहि‍त्य के जशन का पर्यावाची बन गया है। हर साल जनवरी में ग़ुलाबी 'रेगि‍स्तान' शब्दों के समंदर में डूब जाता है, जि‍समें दुनि‍यां भर के नामी कलमकार अपने वि‍चारों की लहरें लेकर आते हैं और दुनि‍या भर से आए साहि‍त्य प्रेमि‍यों को अपनी नमकीन बूंदों से सराबोर कर जाते हैं। 2016 में ज़ी जयपुर लि‍ट्ररेचर फैस्टीसवल अपना एक दशक पूरा करने जा रहा है, ग़ुलाबी 'रेगि‍स्तान' शब्दों के समंदर का स्वारगत करने के लि‍ए तैयार हो चुका है।   21 से 25 जनवरी तक चलने वाले साहि‍त्य के इस महांकुंभ में सदाबहार कथाकार रस्किा‍न बांड, इस साल के मैन बुकर सम्मान प्राप्त लेखक मैरन जेम्ज़‍, भारत के चर्चि‍त मनोवैज्ञानि‍क व लेखक सुधीर कक्ककड़, वि‍श्व वि‍ख्यात अदाकार व कॉमेडि‍यन स्टीिफन फ्राई, हि‍ंदी कथाकार, कवि‍ व उपन्यासकार उदय प्रकाश, अल्काि साराओगी, कॉल्म् टायबि‍न,...
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भारतीय भाषाओं का महाउत्सव समन्वय 2015

इंडिया हैबिटाट सेंटर में भारतीय भाषा महोत्सव ‘‘समन्वय: 2015’’ के पांचवां संस्करण पिछले हफ्ते संपन्न हुआ। इस साल ‘‘समन्वय’’ की थीम है - इनसाइडर/आउटसाइडर - राइटिंग इंडियाज ड्रीम्स एंड रियलिटीज’’ रही और इस साल इस आयोजन के स्वरूप में काफी विस्तार हुआ है और इस साल के महोत्सव में क्यूरेट कला, अनुवाद से लेकर पाक प्रशंसा जैसे विषयों पर जाने-माने विद्वानों द्वारा कार्यशाला, पुस्तक विमोचन, इस महोत्सव के रिसोर्स व्यक्तियों के साथ स्कूलों में सामाजिक संपर्क कार्यक्रम, और कश्मीर, बंगाल, तमिलनाडु और महाराष्ट्र की पाक परंपराओं पर आधारित क्यूरेटड खाद्य स्टाल भी मुख्य आकर्षण रहे। एजाज अहमद, राकेश कक्कड़, परेश नाथ, विदयुन सिंह, रिजियो योहान्नन राज द्वीप प्रज्वलन कर सम्मेलन का उद्घाटन करते हुएइसके अलावा, इस साल के महोत्सव के दौरान लेखकों, अनुवादकों और प्रकाशकों को एक मंच पर लाया गया, जिस दौरान विभिन्न ...